आईजी कॉलेज में लगती हैं दो शिफ्टें

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2535 विद्यार्थी और शिक्षा ग्रहण करने के लिए मात्र 18 कमरे और एक कमरे की बैठने की अधिकतर सीमा है 80 विद्यार्थी। ऐसे में विद्यार्थियों को शिक्षा दी जाए तो कैसे यह स्थिति है क्षेत्र के एकमात्र इंदिरा गांधी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की। हालांकि महाविद्यालय प्रबंधन ने इसके लिए दो शिफ्टों में कक्षाएं लगाने का एक अस्थाई उपाय शुरू किया है लेकिन उससे तो विद्यार्थी संतुष्ट हैं प्राध्यापक। बार बार अवगत करवाए जाने के बावजूद तो सरकार और ही उच्चतर शिक्षा विभाग इसका कोई संज्ञान ले रहे। जिस कारण मजबूरी में ये हजारों बच्चे तंग कक्षाओं में शिक्षा ग्रहण कर अपना भविष्य संवारने का प्रयास कर रहे हैं। 

ऐसेएडजस्ट की हैं कक्षाएं 

करीबढाई हजार विद्यार्थियों को शिक्षा देने के लिए महाविद्यालय प्रबंधन ने एडजस्टमेंट की हैं। जिसके तहत आर्ट्स के करीब 1500 विद्यार्थियों की कक्षाएं सुबह 9 से दोपहर बाद ढाई बजे तक लगाई जाती हैं। इसके अलावा बीकॉम, एमकॉम, बीबीए बीसीए के विद्यार्थियों की कक्षाएं 11 बजे से शाम साढ़े चार बजे तक लगाई जाती हैं। दोपहर 12 बजे के बाद महाविद्यालय में कक्षाएं लगाने जाने वाली छात्राओं ने भास्कर को बताया कि इस तपती गर्मी के मौसम में महाविद्यालय जाना एवरेस्ट चढऩे के समान है। उन्होंने महाविद्यालय प्रबंधन, प्रशासन सरकार से मांग की है कि शीघ्र ही कमरों की व्यवस्था की जाए। 

हुड्डाने की थी घोषणा 

पूर्वमुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 24 मार्च 2013 को विकास रैली में महाविद्यालय में 20 कमरे बनवाने साइंस कक्षाएं शुरू करने की घोषणा की थी। करीब ढाई साल बीत जाने के बावजूद अभी तक तो कमरे ही बने और ही साइंस कक्षाएं ही शुरू हो पाई हैं। प्रिंसिपल डॉ. विकास आनंद ने बताया कि कमरों की कमी के बारे में उच्च शिक्षा विभाग को अवगत करवाया गया है। फिलहाल समय का निर्धारण कर बच्चों को शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है। 

आईजी कॉलेज में एक कमरे में शिक्षा ग्रहण करते हुए बीकॉम के विद्यार्थियों का निरीक्षण करते उपप्राचार्य रमेश बेनीवाल, साथ में प्राध्यापिका शिल्पा ठकराल। 

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